कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 253 तीर्थयात्री नेपाल में फंसे, 103…

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काठमांडो। तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा से नेपाल के जरिए वापस आने के दौरान फंसे करीब 1,500 भारतीयों में से 250 से ज्यादा को हिलसा से बुधवार को निकाल लिया गया। वहीं अन्य भारतीयों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भारतीय खराब मौसम और भारी बारिश के चलते नेपाल के पर्वतीय क्षेत्र में फंस गए हैं। काठमांडो। तिब्बत में कैलाश मानसरोवर की तीर्थ यात्रा से नेपाल के जरिए वापस आने के दौरान फंसे करीब 1,500 भारतीयों में से 250 से ज्यादा को हिलसा से बुधवार को निकाल लिया गया। वहीं अन्य भारतीयों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। भारतीय खराब मौसम और भारी बारिश के चलते नेपाल के पर्वतीय क्षेत्र में फंस गए हैं। अधिकारी ने बताया कि दूतावास ने विभिन्न यात्रा संचालकों से अनुरोध किया था कि तीर्थयात्रियों को तिब्बत की तरफ रोकने का प्रयास करें क्योंकि वहां पर सुविधाएं बेहतर हैं। इस वजह से हिलसा में लोग कम आ रहे हैं। हिलसा में सिर्फ 51 लोगों ने प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि हिलसा या सिमिकोट में आज किसी की मौत होने की खबर नहीं है। हमारे प्रतिनिधि चिकित्सकीय जटिलताओं का पता लगाने के लिए दौरे कर रहे हैं लेकिन कोई भी बड़ी चिकित्सा जटिलता रिपोर्ट नहीं हुई है। भारतीय दूतावास नेपाल की सेना के संपर्क में है जिसने हेलीकॉप्टर को तैयार रखा है। हेलीकॉप्टर मौसम सुधरते ही उड़ान भरने के लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा है कि स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है और घबराने की जरूरत नहीं है। दूतावास ने अगले तीन चार दिन में सभी भारतीयों को निकालने की उम्मीद जताई। दूतावास ने आज चार सदस्य टीम को नेपालगंज भेजा है। यह टीम सिमिकोट और हिलसा में फंसे तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए अस्थायी कार्यालय स्थापित करेगी। खराब मौसम ने रोकी कैलाश मानसरोवर यात्रा, हेल्पलाइन नंबर जारी अधिकारी ने बताया कि सिमिकोट और तिब्बत में दूतावास के दो-दो कर्मचारियों को तैनात किया गया है। उनके पास जरूरी सुविधाएं हैं जिनके जरिए वहां फंसे हुए भारतीय अपने घरों से संपर्क कर सकते हैं।दूतावास कैलाश मानसरोवर यात्रा (नेपाल के जरिए) के नेपालगंज-सिमिकोट- हिलसा मार्ग पर स्थिति पर लगातार नजर बनाया हुआ है।दूतावास ने बताया कि उसने नेपालगंज और सिमिकोट में अपने प्रतिनिधि तैनात किए हैं। वे तीर्थयात्रियों के सम्पर्क में है और उन्हें भोजन एवं आवास मुहैया करा रहे हैं।दूतावास ने सभी यात्रा संचालकों से कहा है कि वह ज्यादा से ज्यादा तीर्थयात्रियों को जहां तक संभव हो तिब्बत की तरफ रोकने का प्रयास करें क्योंकि नेपाल की तरफ चिकित्सीय और नागरिक सुविधाएं कम हैं।सिमिकोट में बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की स्वास्थ्य जांच की गई है और सभी तरह की चिकित्सा मदद उपलब्ध करायी जा रही है।

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