बालावाला का लंकेश,बडोला। 

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अलग पहचान हांसिल किया है। वह जहां भी जाते है उन्हें अपने नाम से काम और रामलीला मंचन में रावण का पात्र में उन्हें लोग लंकेश कहकर बुलाते हैं। तो वहीँ जब वह रामलीला मंचन में रावण का अभिनय कर रहे होते है तो उनके अभिनय को देखकर पंडाल में बैठे छोटे छोटे बच्चे डर से भयभीत हो जाते हैं। रावण का अभिनय सुनील बडोला से हमारी श्रमिक मंत्र टीम ने सबाल पूछे कि जिस प्रकार से आप रावण की अभिनय करते हैं जो कि एक ज्ञानी होते हुए भी क्रूरता व अहंकारी रावण होता है। तो क्या आप अभिनय से हटकर आपकी समान्य जीवन में भी आपकी  रावण के उसी अभिनय जैसा बर्ताव करते हैं या अलग। जिसपर सुनील बडोला ने बताया कि वह तो मेरी अभिनय का एक मात्र बनावटी दृश्य के जैसा है परंतु मेरा स्वभाव रावण के अभिनय से दूर दूर तक भी मेल नहीं खाता है। उन्होंने बताया कि जब वह महज 8 वर्ष के थे तभी से उन्हें अभिनय करने की रूचि थी जो आगे चलकर शौक में बदल गया। और वह पिछले 16 वर्षों से रामलीला का मंचन करते आ रहे हैं जो कि अब जूनून बन गया है। बडोला ने कहा कि अभिनय के लिए वह अपने प्रदेश से बाहर कई अन्य राज्यों में भी अभिनय कर लोहा मनवाया है। 

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