4 मीटर तक पानी भरा है।

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श्रमिक मंत्र रुद्रप्रयाग : 15 जून को सिक्स सिग्मा के सीईओ डॉ. प्रदीप भारद्वाज के नेतृत्व में एक टीम इस इलाके में पहुंची और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगातार भूस्खलन हो रहा है। आपदा के वक्त यहां पर जो मैदान बना था, उनमें भी 4 मीटर तक पानी भरा है। ग्लेशियर तेजी से चटक रहे हैं। हालांकि पानी का बहाव कम है, जिस वजह से आने वाले कई दशकों तक नीचले इलाकों पर कोई संकट नहीं आएगा। पर असली तस्वीर तभी साफ हो पाएगी, जब इस जगह का स्थलीय निरीक्षण और भूगर्भीय अध्ययन होगा। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक जल्द ही चोराबाड़ी ताल और पूरे क्षेत्र अध्ययन करेंगे, जिसकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि सिक्स सिग्मा की टीम से ताल के बारे में पूरी जानकारी ली गई है, जल्द ही भू-वैज्ञानिकों को यहां के दौरे के लिए बुलाया जाएगा।   साल 2013 में आई जलप्रलय ने पूरी केदारघाटी को तबाह कर दिया था। उस वक्त लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से केदारनाथ के पास स्थित चोराबाड़ी ताल का बड़ा हिस्सा ढह गया था। जिसके बाद ताल का पानी सैलाब की शक्ल में तबाही मचाते हुए आगे बढ़ चला। सैलाब आगे बढ़ता गया और पीछे छूट गए तबाही के निशान, जो आज भी देखे जा सकते हैं। कई साल बीत गए लेकिन आपदा के जख्म अब भी ताजा हैं। साल 2013 में उत्तराखंड में बड़ी तबाही मचाने वाले चोराबाड़ी ताल में अब बड़े बदलाव हो रहे हैं, जिन पर वैज्ञानिक नजर बनाए हुए हैं। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक तालाब के चारों तरफ फैला ग्लेशियर टुकड़ों में टूट रहा है और ये ताल एक बार फिर जिंदा होने लगा है। इन दिनों तालाब में पानी भरा हुआ है। हालांकि वैज्ञानिक ये भी कह रहे हैं कि फिलहाल इस ताल का भरना केदारघाटी के लिए खतरे का संकेत नहीं है।   

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