राजधानी देहरादून में दहशरा का धूम। 

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राजधानी देहरादून में दहशरा का धूम। हिन्दू धर्म का इतिहास दिखाई खासकर त्यहारों के दिन दिखाई देते हैं और यह बताने के लिए काफी होता है हिंदू का त्यहार। होली,दिवाली,जन्माष्टमी हो या हों फिर नवरात्रि या दशहरा के आते ही लोगों में अपने संस्कृति से लगाव कितने है यह आजकल देहरादून के अलग अलग मंदिरों में व अलग अलग स्थानों पर हो रहे रामलीला मंचन को देखने के लिए हज़ारों संख्या में आने वाली भीड़ काफी है। वहीँ देहरादून के राजीव नगर पुल स्थित रिस्पना मंदिर में पिछले तीन दिनों से चल रहे दुर्गा पूजा महोत्सव में आस पास के लोगों में काफी उत्साह दिखाई दिया। मंदिर में बच्चों ने अपने गाने पर डांस प्रदर्शन कर समां बांधा। तो वहीँ दूसरी ओर राजधानी के धर्मपुर सुमन नगर स्थित पर्वतीय रामलीला कमेटी द्वारा संचालित रामलीला मंचन को देखने दूर दूर से दर्शक आये। आपको बता दूँ कि पर्वतीय रामलीला कमिटी पिछले 10 वर्षी से रामलीला का मंचन करते आ रही है। इस मंचन में भाग लेने वाले पात्र अपने मंचन को बेहत्तर प्रदर्शन करने के लिए नवरात्रि से दो माह पूर्व से ही अपनी तैयारी शुरू कर देते है। रामलीला कमिटी के संयोजक ललित जोशी ने बतया कि पर्वतीय रामलीला कमिटी की पहचान राजधानी देहरादून में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपने रामलीला मंचन को लेकर प्रसिद्धि हांसिल किया है। उन्होंने बताया की इस तरह के मंचन से हमारे संस्कृति को जिन्दा रखने में अहम् भूमिका ही नहीं रहती खासकर यूथ को अपने संस्कृति का ज्ञान के साथ साथ अच्छे बुरे की सोच की भी जागृति होती है और इसका उदाहरण है देहरादून का यह पर्वतीय रामलीला कमेटी का यह रामलीला मंचन। कारण जहां आजकल लोग अपने अक्सर मोबाइल से चिपटे नज़र आते है लेकिन लोग इन दिनों उसे भी त्याग कर अपने परवारों के संग यहां रामलीला मंचन देखने हज़ारों की संख्या में लोग यहां नज़र आते है और यह संख्या ये दर्शाता है की आज भी लोगों को अपने संस्कृति से अटूट लगाव है। 

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