तानाशाह नगर आयुक्त,पांडेय।

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तानाशाह आई०ए०एस० नगर आयुक्त शंकर पांडेय। जी हां आपने अबतक तानाशाह की कहानी सिर्फ किताबों व कहानियों में ही सुनी होगी,लेकिन आज हम आपको एक ऐसे तानाशाह  आई०ए०एस० अधियकारी को दिखता हूँ जिसे देखकर आप कहानी वाले तानाशाहों को भुल जायेंगें। ये वही तानाशाह अधिकारी विनय शनकर पांडेय हैं जिन्होंने ने कुछ दिनों पहले नगर निगम के अपने सिहासन रुपी सीट से राजधानी देहरादून के सभी व्यापारियों पर लाइसेंस शुल्क लेने का फरमान जारी किया था। जिसका देहरादून के व्यापारियों ने जोड़दार विरोध ही नहीं करा बल्कि  निगम को भी घेर लिया। और आयुक्त के उस फरमाना का खामियाजा उठाना पड़ा सीधे साधे मेयर गामा को। वहीँ जब पूर्व में कुछ व्यापारियों ने आयुक्त साहब से अपने लाइसेंस के नाम पर जारी फरमान को वापस लेने की बात कही तो उल्टा खुद को अमित शाह समझ बैठे और कहा कि अब हर हाल में लाइसेंस शुल्क लिए जायेंगे। वहीं जब श्रमिक मंत्र टीम ने नगर निगम में हाउस टैक्स जमा किए जा रहे संबंधी से लोगों की पड़ेशानी पर चंद सबालात करने आई०ए०एस० महोदय के ऑफिस का रूख किया। तो एक सुलझे हुए उच्च अधिकारी ने जो मीडिया से सलूक करा वह अपने आप में हैरान करने वाला था। जैसे ही श्रमिक मंत्र की आईडी हाथों में देखा तो आयुक्त साहब का चेहरा देखने वाला था। श्रमिक मंत्र न्यूज़ सिर्फ नगर आयुक्त से यह सबाल पूछने की कोशिश की थी कि जिस प्रकार से यहां सीनियर सिटीजनों के लिए टैक्स जमा कराने की अलग से लाइन की व्यवस्था नहीं की गयी है। जबकि आयुक्त साहब ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए प्रमुख समाचार पत्रों में निकलवा रखा था कि महिला व पुरुष सीनियर सिटीजनों के लिए अलग लाइन की व्यवस्थाएं की गयी है,लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं था। यह बताने के लिए हम आपको सुनते हैं सीनियर सिटिज़न की पड़ेशानी उन्हीं की जुबानी। तो देखा आपने किस प्रकार से नगर निगम में अपने टैक्स चुकाने के लिए जदोजहद कर रहे है यह बुजुर्ग लोग। तो क्यों टमाटर के तरह लाल हो जाते है विनय शंकर पांडेय,शायद उन्हें एक चाटुकार पत्रकारिता वाले लोग जो पसंद हैं। उन्हें सच्चे व् निर्भीक व वेबाक पत्रकार पसंद नहीं है। कारण एक निर्भीक पत्रकार अपने वेबाकी से पत्रकारिता करे यह आई०ए०एस० पांडेय को नहीं पसंद है। परंतु नगर आयुक्त यह भूल रहे हैं कि जब भी लोगों की समस्या आयेंगें हम फिर आपसे सबाल पुछने नगर निगम जरूर आएंगे।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आई० एस० महोदय को श्रमिक मंत्र से ऐसी क्या नाज़रागी है जो कि वह हर बात को व्यक्तिगत लेते हुए नज़र आते हैं। हमारा नगर आयुक्त से व्यक्तिगत न कोई रंजिश है  कोई नज़राज़गी,लेकिन आयुक्त महोदय श्रमिक मंत्र के साथ प्रतिशोध की भावना रखने के पीछे उनकी मंशा क्या है यह तो नगर आयुक्त ही बेहत्तर समझ सकते है।  

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