मौत का सफर, ट्रॉली में देश का ‘भविष्य’

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रुद्रप्रयाग: आपदा के 5 साल बाद भले ही केदारनाथ धाम को नई केदारपुरी में बदलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य सरकार उस आपदा के जख्म को भूलाने में कामयाब रही हो, लेकिन जनता नहीं भूल पाई है। यहां के हालात अभी भी बेहद खराब हैं। आज भी लोग जान जोखिम में डालकर मंदाकिनी नदी को पार कर रहे हैं। वजह सिर्फ इतनी है कि यहां पुल नहीं बना पाया है।आपदा के बाद भले ही केदारनाथ यात्रा पटरी पर लौट आई हो, लेकिन यहां के हालतों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। दर्जनों गांव के ग्रामीण आज भी आवाजाही तारों पर झूलती ट्रालियों से कर रहे हैं। केदारनाथ आपदा के बाद भले ही सरकार ने धाम में अरबों-खरबों खर्च कर दिये हों, लेकिन केदारघाटी के आपदा पीड़ितों की दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।

आखिर कब बनेगा पुल?

मंदाकिनी नदी पर बहे झुला पुल का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से दर्जनों गांव के ग्रामीण, स्कूली छात्र घंटों लाइन में खड़े होकर उफनती नदी के ऊपर से ट्रालियों के सहारे आवाजाही करते हें। वहीं,  कभी-कभी उन्हें स्कूल जाने में भी देरी हो जाती है। उधर, पिछले कई सालों में इन ट्रालियों से गिरकर लोगों की जानें भी जा चुकी हैं, जबकि कई घायल भी हो चुके हैं। हैरानी की बात तो ये है कि आपदा के करीब 5 साल बीत जाने के बाद भी क्यों सरकार यहां एक स्थाई पुल नहीं बनवा पा रही है। जानकारी के मुताबिक, स्थानीय लोग व स्कूली छात्र इसको लेकर भूख हड़ताल के साथ-साथ धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन अबतक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है, जिसकी वजह से जनता में आक्रोश है। गौर हो कि, साल 2013 में आई आपदा में विजयनगर पुल बह गया था। 31 मार्च 2014 को 3 करोड़ 34 लाख की लागत से इस पुल को बनाने की स्वीकृति दी गई थी। तमाम विभागीय प्रक्रियों को पूरा करने के बाद मार्च 2015 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन भूमि को लेकर स्थानीय लोगों ने विवाद किया, जिसकी वजह से लोक निर्माण विभाग ने इस पुल का डिजाइन बदल दिया।

सरकार दे इस ओर ध्यान

विभाग द्वारा दी गई सारी धनराशि खर्च भी हो गई लेकिन ब्रिज का निर्माण आधा ही हो सका। डिजाइन बदलने की वजह से इस पुल का बजट 4 करोड़ 21 लाख रुपये हो गया। शासन को इससे अवगत भी करा दिया गया लेकिन फिर भी पुल का काम आगे नहीं बढ़ पाया।तमाम आंदोलन करने के बाद 7 फरवरी 2018 को इसे शासन द्वारा स्वीकृति दी गई, लेकिन 421 लाख रुपये के सापेक्ष लोनिवि को केवल अभी तक एक करोड़ ही मिल पाये, जिसकी वजह से इस ब्रिज का निर्माण कार्य ढीली गति से चल रहा है।नीचे उफनती मंदाकिनी नदी के बीचों-बीच ट्रालियों के जरिए लोग आवाजाही कर रहे हैं, जो कि बहुत ही रिस्की भरा काम है। इसके अलावा स्कूली छात्र भी नदी को ट्राली के माध्यम से पार कर रहे हैं। हालात ये हैं कि, कभी-कभी तो बच्चों की लंबी लाइन लग जाती है, जिसकी वहज से उन्हें स्कूल पहुंचने में भी देरी हो जाती है।वहीं, ‘सबका साथ सबका विकास‘ का नारा देने वाली सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा, वरना कभी भी इन बच्चों के साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इस खबर को दिखाने का हमारा उद्देश्य ये है कि, जल्द ही विजयनगर में मंदाकिनी नदी पर आवाजाही के लिए पुल बनाया जाए, क्योंकि छात्रों को स्कूल जाने में बहुत दिक्कत हो रही है। हम सरकार पर किसी भी तरह के कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं।

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