धूल फांक रहा है,गांधी शताब्दी में वार्ड ।  

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धूल फांक रहा है,गांधी शताब्दी में कोरोना महामारी वार्ड ।     
कोरोनेशन हॉस्पिटल के अधीनस्थ गांधी शताब्दी में कोरोना के मरीजों की राह तकते दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात तो यह कि स्वाथ्य विभाग द्वारा गांधी शताब्दी को कोरोना महामारी मरीजों के लिए ऊपरी तल पर कोरोना वार्ड बनाए गए। जिसे बनाने में स्वाथ्य विभाग के लाखों रूपये खर्च हो गए। परन्तु आज तक इसे उपयोग में नहीं करा जा सका है,तो फिर इसे कोरोना वार्ड बनाने पर लाखो रूपये लगाने की जरुरत ही क्या थी। जबकि कोरोना के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज को ही कोरोना मरीज के लिए अलग से वार्ड डेवलप किया जा चूका है। और इसे आधुनिक टेक्नोलोजी वार्ड बनाने के साथ साथ 40 नए वेंटिलेटर भी मंगाए जा रहे है। अब सबाल उठता है कि जब गाँधी शताब्दी हॉस्पिटल कोरोना के हिसाब से उपुक्त नहीं था,तो इस बात की पुष्टि यहां कोरोना वार्ड बनाने से पहले क्यों नहीं हुयी। अब इससे तो साफ साफ़ जाहिर होता है कि गाँधी शताब्दी को कोरोना वार्ड बनाने के पीछे मकसद स्वास्थ्य विभाग के रुपयों को ठिकाने लगाना था। यदि ऐसा नहीं होता तो आज यहां के कोरोना वार्ड में ताले व वार्ड में रखे गए मरीजो के बेड मरीजों को तकते नज़र नहीं आते। कारण यहां कोरोना वार्ड में लगने वाला रूपये हॉस्पिटल में  और  के काम में आते।  वही गांधी शताब्दी व कोरोनेशन हॉस्पिटल के सीएमस बी सी रमोला की अमेरिकी राष्टपति ट्रंप पर किये गए कमैंट्स आजकल सुर्ख़ियों में है। जिसमे ट्रंप ने यह बात शेयर की थी कि अमेरिका में मास्क की भारी किल्ल्त व कमी हो गयी है। डॉक्टर्स मास्क के जगह स्कार्फ लगाकर अपना काम करें। परन्तु  हमारे  बी सी रमोला तो ट्रंप से भी आगे निकलकर बिना सोचे समझे ही मीडिया को बेतुकी बयान दे दिए। रमोला अपने हॉस्पिटल में काम कर रहे डॉक्टर्स को कहा कि वह भी मास्क के जगह अंगोछा बांधकर काम करें। अब सीएमस का यह बेतुकी बयान पुरे स्वास्थ्य विभाग दवारा कोरोना महामारी रोकथाम के लिए पानी की तरह बहाए जा रहे रुपयों पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया। मसलन रमोला की बातों से यह साबित होता है कि स्वास्थ्य विभाग के पास मास्क खरीदने तक के लिए फंड उपलब्ध नहीं है।      

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