शराब पिलाकर बदमाशों ने मारी गोली।

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शराब पिलाकर बदमाशों ने मारी गोली।
गोरखपुर,21 से 25 की उम्र के बीच के ये सारे युवक गैंगों के बीच इस कदर बंटे हुए थे कि उन्हें इलाके में खुद की दबंगई कायम करनी थी और दिवाकर तथा कृष्णा इसमें इनके लिए रोड़ा बन रहे थे। क्योंकि जो यह चाहते थे वही वह भी करना चाहते थे और उनके होते हुए यह गैंग हावी नहीं हो पा रहा था। आपस में अक्सर दोनों गैंग के बीच टकराव सामने आती थी। महादेव और महाकाल के रूप में उन्होंने अपना व्हाटसएप ग्रुप बनाए थे। कहीं कोई बात होती तो उस ग्रुप पर सूचना डालते ही कुछ मिनटों में दर्जनों युवक इकट्ठा हो जाते फिर लड़ाई और बढ़ जाती। वर्चस्व की जंग में खुद को एक दूसरे पर हावी होने के लिए शुरू हुई लड़ाई ने दो चचेरे भाइयों की जान ले ली। हत्यारोपियों की उनसे इस कदर दुश्मनी थी कि सभी ने उन्हें गोली मारी थी। दोनों भाइयों को 12 गोली मारी गई थी। सभी ने इन पर गोली चलाकर अपनी भड़ास निकाली थी। पुलिस के खुलासे के बाद जब यह घटना सामने आई और पता चला कि दो वर्गों में इस कदर दुश्मनी थी तो सभी सन्न रह गए। 2018 में शराब की दुकान पर दोनों पक्षों में हुई जमकर मारपीट के बाद एक दूसरे के प्रति बढ़ी थी अदावत। मारपीट में दोनों तरफ से 17 लोग हुए थे घायल। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ कराई थी एफआईआर। उसकी बाद से चल रही थी दुश्मनी, दिवाकर और कृष्णा की हत्या के लिए मौके की तलाश में रहता था गैंग। इनकी वजह से उनके वर्चस्व में आ गई थी कमी। अनिकेत दोनों गैंगों से जुड़ा हुआ था। उसने बताया था कि कृष्णा और दिवाकर को कैसे खत्म किया जा सकता है। अनिकेत ने शराब की उनकी कमजोरी को अधार बनाकर उन्हें बंधे के किनारे ले आने का प्लान बनाया था। इस प्लान में खर्च का जिम्मा अमन उठाया था। शराब पिलाने के लिए आने वाले पैसे की व्यवस्था अमन ने की थी। प्लान के मुताबिक मुकेश के जरिये अनिकेत ने ही दिवाकर और कृष्णा को शराब की पार्टी के लिए गोर्रा नदी पर बंधे के किनारे बुलाया था। मुकेश उन्हें अपनी बाइक पर बैठाकर लेकर गया था। अनिकेत ने उन्हें खूब शराब पिलाई। शराब खत्म होने पर शराब ले आने के बहाने वह वहां से निकला भी था। पेट खराब होने का बहान बनाकर कई बार वह नदी के किनारे भी गया था। अनिकेत ही हमलावरों को मोबाइल फोन के जरिये पल-पल की खबर देता था। करीब ढाई घंटे तक चली पार्टी में जब शराब पीकर दोनों बेसुध हो गए तब अनिकेत ने आने का इशारा किया। बदमाशों ने हत्या से पहले हर तरह की सावधानी बरती थी। उन्होंने जगह का स्वयं चयन किया था। यही नहीं किस तरह से नदी के किनारे-किनारे पैदल चलकर वहां पहुंच सकते हैं इसकी भी रैकी की थी। वह चाहते थे कि दिवाकर और कृष्णा को किसी भी तरह की आहट न मिले जिससे कि वे भाग सकें इसलिए उन्होंने पहले खूब इंतजार किया। अपनी बाइक काफी दूर खड़ी करने के बाद नदी के किनारे-किनारे पैदल चलकर उनके पास पहुंचे और अचानक इस तरह से उन्हें घेर लिया कि वे भाग भी न पाएं। उसके बाद उन्होंने गोलियों से भून दिया। दिवाकर और कृष्णा के अलावा उन्हें मुकेश को भी रास्ते से हटाना था जिसके कि कोई सुराग न रह पाए यही वजह थी कि उन्होंने अनिकेत ने मुकेश के जरिये उन्हें बुलाया था। पर बदामशों के टार्गेट पर पहले दिवाकर और कृष्णा थे जब उन्हें गोलियों से छलनी करने लगे तब मुकेश मौका लगते ही भाग निकला और उसी ने चरवाहों से बताया था कि वहां गोली चली है, दो लोगों की हत्या हो गई है पुलिस को खबर कर दो। चरवाहों के जरिए गांववालों को और फिर पुलिस को खबर हुई थी।

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