सबसे ऊपर कहा जाता है अन्नदान को। 

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दान में सबसे ऊपर कहा जाता है अन्नदान को। जी हाँ सही सुना आपने वैसे तो दान देना अपने आप में बहुत ही पुण्य का काम है,यदि अन्नदान की बात करे तो यह दान सर्वोपरी है। क्योंकि आप किसी व्यक्ति को खाना जो खिलाते है यही सोच रखते हैं एक संस्थापक अश्वनी नेगी व राधेश्याम जोशी। नेगी ने बताया कि यह प्रेरणा उनके मन में उस वक़्त आया था जब कभी दून हॉस्पिटल अपने किसी परिचित को देखने आते थे तो वह देखते थे कि जो सुखी सम्पन्न व्यक्ति है वह तो बाहर से भी खाना मंगाकर खा सकता है लेकिन वहीँ कुछ मरीज व उनके साथ आये तीमारदार ऐसे भी होते हैं जो कि काफी गरीब होते है उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वह दोनों टाइम बाहर के होटलों में जाकर खाना खा सकें यही सोचकर उन्होंने यह निश्चिय किया कि क्यों न उन लोगों के लिए एक वक़्त का खाना खिलाने का काम करें। और पिछले माह के 22 अगस्त से वह निरंतर करीब 2 हज़ार लोगों को खाना खिलाकर सेवा करते नज़र आ रहे हैं। नेगी ने बताया कि अभी तक तो वह अपने बुते यह पहल कर रहे हैं आगे चलकर कई अन्य लोग भी आकर अन्नदान करने का पुण्य करेंगें। अश्वनी ने बताया कि आपकी दृढ इक्षा शक्ति प्रबल हों तो आप कुछ भी कर सकते है उन्होंने कहा कि अपने लिए तो हर कोई कुछ करने की इक्षाशक्ति रखते है परन्तु बहुत ही कम लोग ऐसे होते है जो दूसरों के लिए सोचते है। ऐसे अन्नदान करने वाले संस्थापक अश्वनी नेगी व उनके समस्त टीम को श्रमिक मंत्र परिवार धन्यवाद करता है।  

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