फीस के बदले की,साजिश। 

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फीस के बदले साजिश  की सच्ची दास्तां।   
जी हां सही सुना आपने वो 3 अगस्त 2019 का वो मनहूष दिन था जिसने 3 अविभावको के साथ साथ बोर्डिंग स्कूल में भी मचा दी सनसनी। और ये सबके सब हुआ इन तीनो अविभावको में से किसी एक अविभावक की घटिया व घिनोने सोच की वजह से। माना कि आजके तारिख में पैसा ही सबकुछ है लेकिन किसी की इज्जत से बढ़कर नहीं। यदि हम यूं कहें की पैसा तो जिंदगी में कभी भी कमाया जा सकता है परंतु किसी की इज्जत व सोहरत गलती से भी बदनाम हो जाए तो फिर वह वापस नहीं मिलती। ऐसा ही एक मामला हुआ है देहरादून स्थित सुंदरवाला दून इम्पीरियल रेजिडेंट स्कूल में। जहां पिछले दिनों 9 अगस्त 2019 को स्कूल प्रबंधन पर लगे थे संगीन आरोप। आरोप था कि स्कूल परिसर में 10 वीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र ने  ,6 ठी कक्षा में पढ़ने वाले  छात्र के साथ किया था कुकर्म । वहीँ स्कूल प्रबंधन इस पुरे प्रकरण को षड्यंत्र व साजिश करार दिया है ,हम बताते हैं इस पुरे प्रकरण की सच्ची दास्तां। हुआ इस कदर कि 3 अगस्त 2019 को 10 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र व 6 ठी कक्षा के छात्र के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गयी। जिसपर 10 वीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र ने उस छोटे बच्चे को दो थपड़  जड़ दिए। जब इस बात की सूचना स्कूल प्रबंधन को लगी तो स्कूल प्रबंधन ने हाथ उठाने वाले 10 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को स्कूल से बहार कर दिया,जो सभी स्कूल करते हैं। और यह मामला शांत  हो गया। अचानक 9 अगस्त 2019 शाम को 6 ठी कक्षा में पढ़ने वाला छात्र के अविभावक वसीम खान ने 10 वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र के विरुद्ध हराशमेंट व कुकर्म करने का केस दर्ज़ करवा दिया। और पिछले 12 वर्षों से निष्ठावान स्कूल प्रबंधक नरेश चहल की मेहनत पर मानो कालिख पोत दी। और बोर्डिंग स्कूल को कर दिया बदनाम। आपको बता दूं कि स्कूल प्रबंधक ने जब श्रमिक मंत्र टीम से मिकार अपनी बात सांझा की जिसे सुनकर आप भी हो जाएंगे हैरान कि क्या कोई अविभावक इतना भी निचे गिर सकता है कि अपने एक होनहार बेटे जिसका चयन इंटरनेशनल स्पोर्ट्स के लिए हुआ था। लेकिन उस बच्चे का अविभावक दिल्ली निवासी वसीम खान बकाया फीस 3 लाख 51 हज़ार व दिल्ली का ही रहने वाला मोहमद आबिद सैफी बकाया फीस की रकम 1 लाख 73 हज़ार न दे पाने की वजह से उल्टा स्कूल पर ही लगा दिए संगीन व घिनोना आरोप। वही आरोपी पिता का भी यही कहना है कि ये दोनों अविभावक अपने बकाया फीस के बदले उसके बेटे को ही बनाया ढाल और इसी ढाल की वजह से उसी रात वसीम अपने बच्चे को स्कूल प्रबंधन से झूठ बोलकर ले गया था कि वसीम की मम्मी का इंतकाल हो गया।  और वह अपने बेटे को लेने के लिए वसीम ने अपने पत्नी को स्कूल भेजा और इसी बहाने अपने बेटे व आबिद सैफी के बेटे को स्कूल से ले गए । अब इस पुरे प्रकरण पर देहरादून पुलिस बहुत ही गंभीरता से जांच कर रही है जिसके बाद ही दूध का दूध व पानी का पानी का सच सामने आ जाएगा। वहीँ स्कूल प्रबंधन ने कहा कि उन्हें देहरादून की पुलिस व यहां के न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि उन्हें न्याय साथ न्याय होंगें ।  

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