राजधानी में प्रदुषणउक्त मिठयां। 

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शहर पैक होता रहा पॉलीथीन में, और मूक दर्शक बने रहे गामा। मेयर गामा के लाख कोशिशों के बाद भी,राजधानी देहरादून में प्रदुषणउक्त मिठयां। जी हां यह बात सौ फीसदी सच है कि पिछले दो माह से देहरादून में मेयर गामा ने दून को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए शहर के अलग अलग हिस्सों में जाकर लोगों को पॉलीथीन इस्तेमाल न करने के संदेश देते हुए नज़र तो जरूर आये। जिस अभियान में मेयर ने अपने निगम की फ़ौज भी उतारे,साथ ही इसे सफल बनाने के लिए अबतक लाखों रूपये पानी के तरह बहाये। लेकिन इसपर खर्च किये गए लाखों रूपये मानो पानी होकर ही रह गया। हद तो तब हो गयी कि दीपावली में गिफ्ट पैक से लेकर मिठाईयां भी पॉलीथिन में बहुत ही फुरर्सत से सजाये गए। लेकिन निगम की जागरूक टीम सिर्फ और सिर्फ मूक दर्शक बनी रही। और दुकानदार से लेकर जागरूक ग्राहक भी लुभावने व चमचमाते पन्नी में पैक उपहार को खरीदते  नज़र आये । और वही चमचमाते गिफ्ट पैक सचिवालय हो या मंत्री निवास, हर जगह दिखाई दिए पॉलीथीन की चमक। वही इस पॉलीथीन की पहुंच ने मेयर गामा के मिशन को फ़ैल कर दिया है,तो वहीँ एक सबाल भी मेयर गामा पर उठते  हैं । कि जब राजधानी में सरेआम लोग दीपावली का उपहार चमकीले पन्नियों में लेकर जा रहे थे,तो निगम की टीम को दुकानों में पन्नी क्यों नहीं दिखाई दिए। यदि निगम पॉलीथीन पर पाबंदी लगाने में सक्षम नहीं थी तो मेयर साहब पॉलीथीन पाबंधी लगाने की नौटंकी क्यों की थी। और इस नौटंकी में निगम के लाखों रूपये क्यों खर्च किए। तो क्या भविष्य में भी निगम इसी तरह लोगों की गाढ़ी कमाई यूँ ही पॉलीथीन पाबंदी के नाम पर लुटाती रहेगी। या उसका फायदा भी होगा,यह तो मेयर गामा से बेहत्तर और कोई नहीं समझ सकता कि  इस पॉलीथीन अभियान के पीछे गामा की मंशा आखिर है क्या। 

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