बीजेपी में शराब माफिया का सामराज्य। 

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बीजेपी के सरकार में शराब माफिया का सामराज्य। जी हां ये बात सुनने में बेशक अटपटा लगता है लेकिन यह बात सौ फीसदी सच है। यदि मौजूदा सरकार के अपने इस ढाई वर्ष के कार्यकाल में यदि प्रदेशभर में कोई कारोबार फला फुला है तो वो है सिर्फ  और शराब  । आपको बता दूँ कि ये वही भाजपा है जो पिछले हरदा सरकार के विरुद्ध को विधानभवन से लेकर सड़कों तक मोर्चा खोली थी,जब हरीश रावत सरकार ने बंजर भूमि पर भांग के खेती पर सब्सिडी देने व इसे व्यावसायिक खेती बनाने की बात कही थी। परन्तु मौजूदा सरकार ने तो पूर्व सरकार को पीछे छोड़ देवभूमि कहे जाने वाले जगहों पर बियर के फैक्ट्री खोलने की अनुमति दे डाली। या फिर यूँ कहें कि सरकार अपने खाली तिजौरियों को शराब बिक्री से राजस्व इकठ्ठा कर उसे भरने के फिराक में है। तभी तो आलम यह है कि शराब माफियाओं के हौंसले इस कदर बुलंद हैं कि वह शराब के नाम पर जहर बेचने से भी बाज़ नहीं आते। वहीँ पिछले वर्ष जनपद हरिद्वार के भगवानपुर में 120 से भी अधिक लोगों की जहरीले शराब पीने से जाने गयी थी। जिसे आज भी लोग उसे भुला भी नहीं पाये थे । कि राजधानी देहरादून में पांच दिन पहले 6 लोगों की और अब दो और की  जहरीले शराब ने मौत की नींद सुला दी। इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटनाक्रम जहां घटित हुयी है वहां से महज चंद दुरी पर मसूरी विधायक गणेश जोशी का निवास स्थान है। बाबजूद भी विधायक जोशी को इस बात की भनक तक नहीं लगी। या फिर विधायक को शराब माफिया के अवैध शराब कारोबार की पूर्व से जानकारी थी। या फिर ये शराब माफिया के हौंसले इतने बुलंद थे कि शारब कारोबारी के लिए क़ानून नाम की कोई चीज ही न हों। वहीं आज के महिला कांग्रेस की  वरिष्ठ कार्यकत्री आशा टम्टा उन परिवारों से मिलने पहुंची जिस परिवार के ऊपर से एक पिता व पति का साया उठ गया है। टम्टा ने बताया की यह बहुत ही दुःखद घटना है इन परिवारों का भविष्य अंधेरे में है और इनके सामने अपने बच्चों की पालन पोषण करना किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार को चाहिए कि शराब कांड में जान गंवाने वाले आश्रितों को कम से कम 10 लाख का मुवाजा दे। 

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