अब तक का सबसे ऊंचा ध्वजदंड ।

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अब तक का सबसे ऊंचा ध्वजदंड था।
इस बार अब तक के सबसे ऊंचे 105 फीट के ध्वजदंड पर झंडा जी का आरोहण किया जा रहा है था। लेकिन अंतिम समय में तेज बारिश और लकड़ी की कैंची टूटने के चलते ध्वजदंड टूटकर गिर गया। ध्वजदंड टूटने के दो घंटे बाद दोबारा दरबार साहिब के सज्जादनशीन श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज के सानिध्य में दोबारा विधिवत पूजा अर्चना के बाद झंडा जी का आरोहण किया गया। इस दौरान श्री गुरु राम राय, झंडा साहिब और जो बोले सो निहाल सतश्री अकाल के जयकारों से झंडा बाजार से लेकर सहारनपुर चैक तक गूंजायमान हो उठा। ऐतिहासिक झंडे जी मेले में शुक्रवार को झंडा आरोहण के अंतिम समय में 105 फीट ऊंचा ध्वजदंड टूटकर श्रद्धालुओं के ऊपर गिर गया। जिसमें आठ श्रद्धालु घायल हो गए। घटना के दो घंटे बाद दोबारा विधिवत पूजा अर्चना और श्रद्धा के साथ शाम करीब पौने सात बजे झंडा आरोहण किया गया। दरबार साहिब परिसर में श्री गुरु राम राय के जन्मोत्सव के मौके पर श्रीमहंत देवेंद्रदास महाराज के की अगुवाई और हजारों भक्तों की मौजूदगी में झंडा साहिब से पुराने गिलाफ को उतारकर नया गिलाफ चढ़ाया गया। इसके बाद नये झंडे जी को दूध, दही, मक्खन, शक्कर और पंचामृत से स्नान करवाया गया। झंडा साहिब को स्नान करवाने के लिए भक्तों में होड़ लगी रही। हर कोई भक्त झंडा जी को छूने को बेताब था। इससे पहले दोपहर साढ़े 12 बजे से भक्तों ने झंडा साहिब का पूजन किया। सबसे पहले मारकीन के बने 40 सादे गिलाफ चढ़ाए गए। इसके बाद मखमली कपड़े से तैयार किए गए सनील के 20 सादे गिलाफ झंडा साहिब को अर्पण किए गए। झंडे जी के सबसे बाहरी आवरण पर सबसे अंत में मखमली दर्शनी गिलाफ चढ़ाया गया। इसके बाद शिखर पर चंवर लगाया गया। श्रीमहंत देवेन्द्र दास ने रीति रिवाज पूर्वक पूजन के बाद संगतों को झंडा आरोहण शुरू करने का निर्देश दिया। दोपहर दो बजकर चालीस मिनट पर झंडा आरोहण का सिलसिला शुरू हुआ। लकड़ी से बनी चार कैंचियों व चार मोटे रस्सों की मदद से जैसे ही 105 फुट ऊंचा झंडा ऊपर उठना शुरू हुआ चारों ओर गुरु राम राय महाराज के जयकारे गूजंने लगे। वहीं शाम चार बजकर चालीस मिनट पर आस्था, विश्वास और उल्लास में डूबी संगते जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल के जयघोष कर रही थी। इसी दौरान अंतिम समय में ध्वजदंड टूटकर संगत के ऊपर गिर गया। जिसके चलते संगतों में अफरातफरी मच गई। मौके पर श्रीमहंत देवेंद्रदास ने स्थिति को संभालते हुए घायलों को उपचार के लिए इंदिरेश हॉस्पिटल भेजने के निर्देश दिए।

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