इक्षाशक्ति हो तो,नेक कामों में आड़े नहीं आती।   

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इक्षाशक्ति हो तो,लॉक डाउन भी नेक कामों में आड़े नहीं आती।   
जी हां यह बात सौ फीसदी सच है कि किसी भी अच्छे काम करने के लिए एक अच्छे इंसान का होना जरुरी है। ठीक उसी प्रकार किसी को भी गर काम करने की इक्षा है,तो उसके इक्षा शक्ति के आगे लॉक डाउन भी उसके आड़े नहीं आती। और इसे सच साबित कर दिखाया है प्रधानाध्यापिका श्रीमती पुष्पा रानी ने। जहां आजकल प्रदेशभर की सभी सरकारी व निजी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। और ऐसे स्थिति में सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वला शिक्षक हो या फिर निजी स्कूलों में। हर कोई खुद को सुरक्षित करने के लिए अपने घरों कैद हो रखे हैं,लेकिन राजकीय प्राथमिक विद्यालय,ढाल वाला सहसपुर ब्लॉक देहरादून की शिक्षिका पुष्प रानी ने उन लॉक डाउन की अपने पैरों में बंधे जंजीर को हटाकर वह दूसरे व तीसरे दिन अपने विद्यालय जाकर वहां की साफ सफाई के साथ साथ स्कूल परिसर में लगे फूल पौंधो को पानी देने का काम करती हैं। जब हमारे श्रमिक मंत्र संवाददाता ने सहसपुर ब्लॉक के स्कूल प्रधानाध्यापिका श्रीमती पुष्पा रानी पूछा कि आपको यहां आने में डर यानि महामारी का कोई खौफ नहीं है । जिसपर प्रधानाध्यापिका ने बताया कि हमलोग अपने परिवार के भी सारे जरुरी कामों भी तो करते है। तो फिर हम अपने स्कूलों की देखरेख क्यों नहीं कर सकते है,उन्होंने कहा की आपको मालूम है की यह लोक डाउन समाप्त होने में अभी 10 दिन और हैं । तबतक इस स्कूल की सफाई नहीं हुयी तो क्या होगा आप समझ सकते है। और उससे भी अधिक चिंता तो मुझे अपने स्कूल में लगे फूल पौधों की हो रही थी । जिन्हें रोजाना पानी की जरुरत होती है,लेकिन अब इन्हे रोजाना तो पानी नहीं दे पाती हूँ,परन्तु हर दूसरे व तीसरे दिन यहां आकर इनकी देखभाल करती हूँ। और इस काम से मुझे बहुत ही संतुष्टि मिलती है,क्योंकि इन फूल और पौंधों को मैं अपने बच्चों जैसा ही प्यार करती हूँ।  प्रधानाध्यापिका के इस नेक इरादे व ज़ज़्बे को श्रमिक मंत्र सैलूट करता है।

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