आखिर क्यों हुए डी०जी०,मेहरबान।

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आखिर क्यों हुए मेहरबान सिंह,मेहरबान। सूचना के चंद मठाधीशों पर मेहरबान की मेहरबानी के पीछे क्या है रहस्य,कानूनी सलाह देने वाले अधिकारी आज खुद भी दिखाई दे रहा है फरेबी कानून के पीछे। जी हां यह बात सौ फीसदी सच है जहां एक और सूचना विभाग बिज्ञापन रोकने की वजह यह बता रही थी की पत्रकारों की बाढ़ सी आ गयी है । मसलन पत्रकारों की कुनबा बढ़ने से डी जी सूचना विभाग पसीने छूटते हैं,लेकिन वहीँ जब प्रदेश में न्यूज़ चैनल्स की पिछले कुछ वर्षों में बेतहां बढ़ोत्तरी हुयी है। यह सूचना अधिकारी को नज़र नहीं आ रहे है। लेकिन अब सूचना अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरूपयोग कर नियम व कायदे को भी ताक पर रखकर सूचना विभाग ने अपने चंद मठाधीशों पर मेहरबान सिंह इतने मेहरबान हो गए कि उन्होंने पूर्व में हुए इनपैनलमेंट स्वामियों को राज्य स्थापना दिवस का विज्ञापन दे डाले। परंतु डीज़ी सूचना इस बात से बेखबर दिखाई दिए कि जिसे वह बिज्ञापन देकर उन्हें खुश करने की कोशिश कर रहे है। कायदे से मेहरबान सिंह की मेहरबानी इन मठाधीशों पर हो ही नहीं सकती। इस बात की पुष्टि खुद सूचना विभाग द्वारा जारी किए गए 2 अगस्त 2019 को संबंधित निविदा प्रस्ताव में यह साफ साफ़ लिखा गया है कि नयी सूचीबद्धता प्रक्रिया पूर्ण होते ही पूर्व से चली आ रही सूचीबद्धता स्वतः ही निरस्त समझी जाएगी। तो फिर यह मेहरबान सिंह ने अपने चंद लोगों पर मेहरबानी क्यों की । आखिर इसके पीछे क्या है रहस्य,और मेहरबान सिंह की मेहरबानी का क्या है सच यह तो डी०जी० सूचना ही बेहत्तर बता पायेंगें।   

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