कार्यप्रणाली पर उठते कई सबाल। 

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नगर निगम के कार्यप्रणाली पर उठते कई सबाल।

 जिस प्रकार से नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स जमा कराए जाने को लेकर देहरादून के सभी वार्डों से भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। परंतु निगम द्वारा हाउस टैक्स जमा करने के लिए उचित व्यवस्था नहीं किए गए है जिससे दूर दराज से आने वाले खासकर सीनियर सिटीजनों को चार से पांच घंटे तक लाईन में खड़े होने पड़ते हैं। न तो इन बुजुर्गों के लिए अलग लाईन हैं न ही महिलाओं के लिय परंतु तानाशाह नगर आयुक्त समाचार पत्रों में निगम की तारीफ करते नहीं थकते और कहते नज़र आते हैं कि देहरादून में सीनियर सिटीजनों के लिए अलग से काऊंटर लगाए गए है। लेकिन तानाशाह आई ए० एस ० अधिकारी के दावे की पोल खोलने का काम किया श्रमिक मंत्र ने। जब श्रमिक मंत्र नगर आयुक्त के उन दावों की सच जानने की कोशिश करा तो वहां का नज़ारा कुछ और ही था। जहां लोग घंटों तक लाइन में लगे होने की बात बतायी तो कुछ लोगों ने निगम पर यह भी आरोप लगाया कि निगम में काउंटर पर बैठे कर्मी अपने रिकॉर्ड खंघालने के बजाय उल्टा ग्राहकों से अपने जमा कराये गए रसीद लाने को कहते हैं। यदि किसी के पास जमा कराये गए रसीद खो जाते है या नहीं मिल पाते है तो नगर निगम उससे पिछले 2014 से हाउस टैक्स के साथ साथ पेनेल्टी के साथ टैक्स वसूलते नज़र आते हैं। इस बात की पुष्टि एक शिकायतकर्ता ने बाकायदा प्रूफ के साथ पुराने रसीद व नए शुल्क की सबूत दिए जो कि निगम के पोल खोलने के लिए काफी है। तो निगम के इस लचर कार्यशैली पर सबाल उठना लाजमी है। वहीँ जब इस बात की सत्यता जानने के लिए नगर निगम के सिंहासन पर आसीन बहुत ही प्रभावशाली आयुक्त महोदय विनय शंकर पांडेय से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की। तो बाहुबली अधिकारी पांडेय टमाटर की तरह लाल हो उठे। उनके क्रोध को देखकर यह प्रतीत हो रहा है कि तानाशाह आयुक्त से श्रमिक मंत्र उनके निजी सम्पत्ति का ब्यौरा पुछकर उनके जख्मों को खुरदने का काम किया हो। मानो कि तानशाह नगर आयुक्त ने अपने सिंहासन की सभी मर्यादा ही लांघ दिए हों ,लेकिन विनय शंकर पांडेय यह भूल गए कि वह एक पब्लिक सर्वेन्ट हैं और जब भी आम लोगों की समस्या होगी आपको जबाब देना ही होगा। आप किसी भी मीडियकर्मियों के सबाल से इस तरह से कन्नी नहीं काट सकते।  

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