जज पर ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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4 साल पहले यानि मार्च 2015 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला लेते हुए अनुराधा गर्ग के निलंबन के आदेश जारी किए थे। उस वक्त अनुराधा काशीपुर में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थीं। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। प्राथमिक स्तर की जांच में अनियमितता की बात सही पाई गई थी। बाद में हाईकोर्ट ने अनुराधा गर्ग के निलंबन के आदेश दिए थे। जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार के एक मामले में हाईकोर्ट ने अनुराधा गर्ग के खिलाफ गोपनीय जांच कराई थी। दो बार जांच हुई, जिसके बाद रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई थी। 24 मार्च 2015 को हाईकोर्ट के रजिस्टार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुराधा गर्ग का निलंबन पत्र जारी किया था। मामले की अंतिम जांच जारी थी। जांच में अनुराधा गर्ग दोषी पाई गईं, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।काशीपुर की एसीजेएम रहीं अनुराधा गर्ग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बाद अनुराधा गर्ग को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। उत्तराखंड न्यायपालिका से जुड़ी इस अहम खबर के मुताबिक अनुराधा गर्ग अब सेवा में नहीं रहेंगी। उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। अनुराधा गर्ग 2005 की बैच की न्यायिक अधिकारी हैं। साल 2015 में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। एक मामले में उनके खिलाफ गोपनीय जांच कराई गई थी। जांच के वक्त उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब इस मामले में जांच पूरी हो गई है। 4 साल तक चली जांच में काशीपुर की एसीजेएम रहीं अनुराधा गर्ग को दोषी पाया गया। जिसके बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। उत्तराखंड में ऐसा पहली बार हुआ है, जबकि किसी जज को बर्खास्त किया गया है। अनुराधा गर्ग भ्रष्टाचार में लिप्त पाई गई थीं। उन पर गंभीर आरोप लगे थे। नैनीताल हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी की अनुशंसा उत्तराखंड शासन को भेजी थी। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए कार्मिक विभाग ने अनुराधा की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया है।

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