मनमानी पर उतरे ई-रिक्शा वाले

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राजधानी देहरादून ट्रैफिक के बढ़ते दबाव से हांफ रही है। यहां विक्रम और सिटी बस चालकों की मनमानी पहले ही मुसीबत का सबब बनी हुई थी, और अब ई-रिक्शा की वजह से कोढ़ में खाज जैसे हालात बन गए हैं। नियम तोड़ने में ई-रिक्शा चालक अव्वल हैं। ई-रिक्शा के झुंड आम आदमी से लेकर ट्रैफिक पुलिस तक के लिए परेशानी की वजह बन गए हैं। बिना रूट फॉलो किए ये किसी भी गली-मोहल्ले में पहुंच जाते हैं। इस वक्त देहरादून शहर में 2478 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। ई-रिक्शा के संचालन से बेरोजगार युवाओं को रोजगार तो मिला है, लेकिन सच ये भी है कि इनकी वजह से राजधानी ट्रैफिक जाम की समस्या से भी जूझ रही है। शहरी क्षेत्र में हर दिन दो से तीन नए ई-रिक्शा सड़क पर दौड़ रहे हैं। नियम के मुताबिक ई-रिक्शा का संचालन हाईवे पर नहीं हो सकता, पर दून में हाईवे पर भी ई रिक्शा दौड़ रहे हैं। लालपुल, पटेलनगर, रेलवे स्टेशन, घंटाघर जैसे तमाम चौराहों पर ई-रिक्शा के झुंड के झुंड खड़े मिलते हैं। नियम के अनुसार ई-रिक्शा केवल वही चला सकता है, जिसके नाम पर वाहन रजिस्टर्ड होगा। पर दून में एक-एक आदमी के नाम पर 5 से 10 ई रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। लगातार मिल रही शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अब शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि ई-रिक्शा का संचालन केवल वहां कराएं, जहां बस या ऑटो की सुविधा नहीं है। कुल मिलाकर हाईवे पर इनका संचालन रोकने की प्लानिंग चल रही है। अब दून में ई-रिक्शा के लिए रूट व्यवस्था लागू की जाएगी। परिवहन विभाग को ई-रिक्शा चालकों के द्वारा मनमाना किराया वसूलने की भी शिकायत मिली है। ऐसे लोगों के खिलाफ विभाग कार्रवाई करेगा। विभाग ने ई-रिक्शा के रूट तय करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है। शासन की अनुमति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। चेकिंग अभियान चलाकर अवैध रूप से चल रहे ई-रिक्शा के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

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