मां ने नवजात बच्ची को खेतों में छोड़ा

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सरकार बेटियों को बचाने के लिए अभियान चला रही है। लोगों से अपील कर रही है कि वो बेटा-बेटी में भेद ना करें, पर ये भेद सदियों से लोगों के मन में पैठ बना चुका है। इसे खत्म करना इतना आसान नहीं है। आज भी लोग बेटियों को पैदा होते ही सड़क पर फेंक देने तक से नहीं झिझकते। नवजात बच्चियां कूड़े के ढेर में मिलती हैं, सड़क किनारे मिलती हैं, खेतों में पड़ी मिलती हैं…ना जाने कैसे निर्मोही लोग होते होंगे, जिनका पत्थर दिल बच्ची की मासूम सूरत देखकर भी नहीं पसीजता। देहरादून में भी ऐसा ही हुआ है। यहां एक नवजात बच्ची खेतों में पड़ी मिली। बच्ची के साथ कोई अनहोनी हो सकती थी, वो जंगली जानवरों का शिकार बन सकती थी। पर बच्ची की किस्मत अच्छी थी, लोगों ने उसे देख लिया। पुलिस को खबर दे दी। बच्ची को अस्पताल ले जाया गया। और अच्छी खबर ये है कि पैदा होने के जितने कम समय में बच्ची को लावारिस छोड़ दिया गया, उससे भी कम वक्त में बच्ची को एक नया परिवार भी मिल गया। एक स्थानीय परिवार ने बच्ची को गोद ले लिया है। घटना विकासनगर के सहसपुर की है। जस्सोवाला चौक से गुजरते राहगीरों ने सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर सड़क से लगे खेतों से रोने की आवाज सुनी। राहगीर मौके पर पहुंचे तो देखा कि वहां एक बच्ची लावारिस हालत में पड़ी थी। बच्ची की हालत देख लोगों का दिल भर आया। खेतों में बच्ची के मिलने की खबर आग की तरह इलाके में फैल गई। लोगों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को अस्पताल लेकर गई। बताया जा रहा है कि बच्ची सुरक्षित है। इलाके में रहने वाले एक परिवार ने बच्ची को गोद ले लिया है और उसकी अच्छी परवरिश करने का वादा किया है।

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