साली के लिए पत्नी व बेटे, की हत्या।

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साली की चाहत में पत्नी व बेटे की हत्या।
जयपुर,25 जून को सूर्य नगर नाडी का फाटक निवासी अनिता शर्म (38) और बेटे मयंक (14) की विषाक्त पीने से मौत हुई थी। मृतका के पति अनिल शर्मा ने पुलिस को सूचना नहीं दी थी और खुद ही अस्पताल ले गया था। तफ्तीश के बाद हत्या के आरोपी अनिल शर्मा,उसका भाई सुनील शर्मा और साली पूजा को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पहले दोनों को नींद की गोलियां दी थी और फिर सेल्फास पिलाया था। जिस कारण उनकी मौत हो गई थी। मामले में किसी की ओर से कोई संदेह नहीं जताया गया था, लेकिन पुलिस ने खुद ही मामला दर्ज कर खुलासा किया। साली से शादी की चाह में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और बेटे को मौत के घाट उतार दिया। करीब एक महीने पहले राजस्थान की राजधानी जयपुर के करधनी इलाके में महिला और उसके बेटे की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने महिला के पति, देवर और मृतका की छोटी बहन को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने हत्या का षड्यंत्र फिल्मी अंदाज में रचा और खुद को बचाने के लिए छोटे भाई को भी हथियार बना लिया। इसके साथ ही करधनी थाना पुलिस ने मां बेटे की विषाक्त के सेवन से मौत के मामले में गुत्थी सुलझा ली है। निल शर्मा कलेक्ट्री में एलडीसी के पद पर कार्यरत है। शादी के बाद ही उसके अपनी साली पूजा से संबंध बन गए। पूजा की भी कुछ साल पहले शादी हो गई थी, लेकिन पति के साथ नहीं रहती थी। अनिल, पूजा के साथ शादी करने के लिए पत्नी व बेटे को रास्ते से हटाना चाहता था। इसके लिए उसने अपने भाई सुनील को मोहरा बनाया। आरोपी ने करीब एक महीने पहले गांव जाकर के भाई को षड्यंत्र में शामिल किया और कहा कि अगर ऐसा कर देगा तो उसकी भी शादी करवा देगा साथ ही एक मकान व रुपए देगा। प्रलोभन में आकर के उसने हां कर दी तो तभी अनिल उसे नींद की हाइडोज की गोलियां देकर आ गया। साजिश के तहत सुनील अपने भाई के घर आया। इस दौरान अनिल व पूजा अजमेर रोड स्थित एक होटल में जाकर ठहर गए। सुनील ने भाभी और भतीजे को खाने के बाद नींद की 13 गोलियां दे दी। उधर, अनिल व पूजा होटल के कमरे में अपने मोबाइल रखकर के घर के पास आ गए। रात को घर में घुसे और देखा कि उनकी सांसें चल रही है तो शिकंजी में सेल्फास की गोलियां मिलाकर के पिला दी और कुछ खिला भी दी। वहां से निकलकर के फिर होटल पहुंच गए। सुबह घर आने पर घर में उल्टियों के बर्तन साफ करके आत्महत्या की कहानी गढ़कर रोना शुरू कर दिया। अनिल ने बचने के लिए अपने बड़े अधिकारी से पुलिस अधिकारी को फोन करके परेशान नहीं करने की बात कही। जबकि पुलिस ने उससे बात ही नहीं की थी। करीब दस दिन बाद पुलिस अधिकारियों को एक पत्र भेजा, जिसमें छोटे भाई पर हत्या का संदेह जताया। पुलिस का संदेह मजबूत हुआ और उसके भाई से पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। शातिर अनिल ने आत्महत्या दर्शाने के लिए पूरी तैयारी की थी, यदि हत्या का भी अंदेशा होता तो वह भाई को फंसा देता। क्योंकि सुनील भी उसके द्वारा दी गई गोलियों से ही मौत मानकर चल रहा था। जबकि गोलियों से मौत होना मुश्किल था और अनिल ने हत्या के लिए सेल्फॉस रखा था।

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